भोपाल में 'सु-दर्शन' स्मृति ग्रन्थ विमोचन कार्यक्रम

भोपाल, 17 अक्टूबर 2012 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांचवे सरसंघचालक कुप्प्.सी.सुदर्शन जी को हमने महान कर्मयोगी के रूप में देखा है । उनके जीवन दर्शन को देख हम वास्तव में अनुभव करते हैं कि वे एक पुण्य आत्मा के रूप में अवतरित हुये। सुदर्शन जी के जीवन का संदेश यह है कि जो उन्होंने विचार किया उसका संकल्प लिया और उसे पूरा किया। सुदर्शन जी ऐसे महापुरूष थे जो केवल संकल्प घोषित नहीं करते थे बल्कि उसे पूरा भी करते थे। यह उद्गार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैय्याजी जोशी ने विश्व संवाद केन्द्र भोपाल द्वारा मंगलवार को यहाँ आयोजित 'सु-दर्शन' स्मृति ग्रन्थ विमोचन कार्यक्रम में व्यक्त किया।

उन्होंने सुदर्शन जी के जीवन के कई वृतान्तों का वर्णन करते हुये बताया कि सुदर्शन जी कोई भी बात बिना अध्ययन के बोलने की अनुमति नहीं देते थे। सभी कार्यकर्ताओं को चिंतन, अध्ययन के बल पर कार्य करना चाहिये यही उनका संदेश है। सारे समाज को जोडने का उनका प्रयास अद्भूत है। उनके इन्हीं प्रयासों के चलते उनके चिंतन का प्रयास पूरे देश का प्रयास बन जाता था।

उन्होंने बताया कि सुदर्शन जी अपनी बातों को किसी के भी समक्ष बेबाक तरीके से रखते थे। इससे उनके हृदय की पारदर्शिता परिलक्षित होती है। उन्होंने जो कुछ भी अध्ययन और संस्कारों द्वारा अपने जीवन में प्राप्त किया था उन्हें अपने तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे दूसरों में बांटते रहे। स्मृति ग्रन्थ में सत्यमित्रानंद जी के लेख का उल्लेख करते हुये उन्होंने बताया कि सुदर्शन जी जैसे व्यक्ति पृथ्वी पर आये यह पृथ्वी का भाग्य है।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज हमें सुदर्शन जी की जरूरत है इसे मानना होगा। उनका लगातार मार्गदर्शन मुझे प्राप्त होता रहा है। वे सदैव ही हिन्दी के आग्रही थे। उनका आग्रह था कि हिन्दी विश्वविद्यालय होना चाहिये, जहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में हो सके। मेरा सौभाग्य है कि उनके रहते यह कार्य कर सका। निज भाषा की उन्नति सब उन्नति का मूल, यह विचार उनका था। वे जैविक खेती के भी आग्रही थे। वे हमेशा अमृत माटी और अमृत जल को खेती में प्रयोग करने के लिये हमे प्रोत्साहित करते थे। वे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा की बात करते थे। वे गौ संरक्षण के आग्रही थे। जिसको ध्यान में रखकर हमने गौ अभयारण्य बनाने का फैसला किया है। 

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार मुजफ्फर हुसैन ने सुदर्शन जी की देशज ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिकता की उनकी समझ के बारे में बताते हुये कहा कि उनकी आंखे वैज्ञानिकता को पहचानती थी। उन्होंने बताया कि जनता के पैसों से हिन्दुस्तान का पहला समाचार पत्र 'स्वदेश' निकालने का श्रेय उन्हीं को जाता है। पत्रकारिता को लेकर भी उनमें वैज्ञानिक दृष्टि थी जिसका लाभ हमें समय-समय पर मिलता रहा है। उन्होंने मण्डला में सुदर्शन जी के मित्र बंशी का वृतान्त बताते हुये कहा कि वहां के डॉक्टर ने सुदर्शन जी को मां भारती के अन्दर जो भ्रष्टाचार, अलगांववाद का जहर है उसे निकालने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने उद्बोधन में अंत में कहा कि दृष्टि से सृष्टि के निर्माण के लिये हमे कई सुदर्शन की आवश्यकता होगी।

समन्वय भवन सभागार, भोपाल में 'तरूण भारत, नागपुर' द्वारा प्रकाशित 'सु-दर्शन' नामक इस स्मृति ग्रन्थ का विमोचन मा. श्री भैय्याजी जोशी द्वारा किया गया। इस दौरान एनसीईआरटी के पूर्व अध्यक्ष श्री जे.एस. राजपूत, तरूण भारत, नागपुर की प्रकाशन संस्था नरकेसरी प्रकाशन के अध्यक्ष डॉ. विलास डांगरे, प्रबंध संचालक विश्वास पाठक, विश्वी संवाद केन्द्र भोपाल के अध्यक्ष श्री लक्ष्मेन्द्र माहेश्वंरी मंच पर उपस्थित थे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अधिकारी, कार्यकर्ता, म.प्र. शासन के मंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रभात झा, संगठन मंत्री श्री अरविन्द मेनन एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।