उज्जैन समन्वय बैठक के बाद सरकार्यवाह श्री भैय्याजी जोशी जी का प्रेस वक्तव्य


$img_titleएक ही उद्देश से प्रेरित राष्ट्र एवम् समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संगठन के प्रमुख कार्यकर्ता ३-४ वर्षों के अंतराल से विचार विमर्श के उद्देश्य से एकत्रित होते है। परस्पर अनुभवों का आदान-प्रदान होता है।

इसी शृंखला में उज्जैन में यह समन्वय बैठक संपन्न हुई है, जिसमें विभिन्न पहलुओं पर विचार हुआ है। साथ ही वर्तमान सामाजिक परिस्थिति पर भी चिंतन हुआ है।

काले धन की वापसी और भ्रष्टाचार देशव्यापी चिंता का विषय बना है। जनसामान्य को व्यथित करने वाली इस समस्या के प्रति जनभावनाएं आंदोलन के माध्यम से प्रखरता से प्रकट हो रही है। अ. भा. वि. प. द्वारा संचालित ‘यूथ अगेन्स्ट करप्शन’ का आंदोलन हो या स्वामी रामदेवजी के मार्गदर्शन मे ‘भारत स्वाभिमान ट्रस्ट’ के तत्त्वावधान में चल रहा आंदोलन हो अथवा अण्णा हजारे जी के नेतृत्व में ‘जनलोकपाल’ की मांग लेकर चलाये जा रहे आंदोलन को मिलनेवाला व्यापक जनसमर्थन देशभक्ति तथा प्रखर भावना का परिचायक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मार्च २०११ में संपन्न हुई ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधी सभा’ में पारित प्रस्ताव में यह स्पष्ट रूप से कहा है कि, भ्रष्टाचार के विरोध में चलने वाले आंदोलनों का संघ समर्थन करता है। उसके अनुसार संघ के स्वयंसेवक ऐसे आंदोलनों में सभी के साथ सक्रिय रूप से सहभागी हो रहे है। अत: हमारा यह समर्थन जारी रहेगा। हमारा यह मानना है कि विभिन्न आंदोलनों के समन्वित प्रयास होने की आवश्यकता है। सब मिलकर चलें यह आवश्यक है।

शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक एवम् अनुशासित ढंग से चल रहे आंदोलन का दमन करने का शासन का रवैया, आंदोलनकर्ताओं से चर्चा करते हुए समाधान ढुंढने के स्थान पर उनको कारागार में भेजना यह समझ से परे है। लोकतंत्र में जनभावनाओं का सम्मान करते हुए समाधान की दिशा में पहल हो यह सरकार की जिम्मेदारी है।

राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (National Advisory Council) द्वारा प्रस्तुत सांप्रदायिक एवम् लक्षित हिंसा नियंत्रण अधिनियम २०११ विधेयक देश की एकात्मता एवम् सामाजिक सौहार्द को गंभीर हानि पहुंचाने वाला सिद्ध होगा। यह विधेयक संविधान की मूलभूत भावना पर आघात करता है। इतना ही नही तो यह समाज में अविश्वाेस तथा विघटन निर्माण करने वाला रहेगा। यह प्रस्तावित विधेयक समिती (NAC) की सांप्रदायिक एवम् विघटनकारी मानसिकता को उजागर करता है।

यह प्रस्तावित विधेयक संविधान के द्वारा निर्मित संघीय रचना की उपेक्षा करने वाला सिद्ध होगा और राज्यों को प्राप्त अधिकारों का हनन करने वाला रहेगा। अत: इस प्रस्तावित विधेयक को सरकार सिरे से नकारे एवम् इस देश की एकात्मता को सुरक्षित रखें। इस प्रकार का विधेयक प्रस्तुत कर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने स्वयं की देश के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रश्नेचिन्ह खडा कर दिया है।

समाज के विभिन्न समुह प्रत्येक स्तर पर इस प्रस्तावित विधेयक का कडा विरोध करेंगे।

सरकार को चाहिए की समाज के सौहार्द के लिए हानिकारक एवम् सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने वाली इस पहल पर गंभीरतापूर्वक विचार करें।

-उज्जैन २० अगस्त २०११