प्रेस वक्तव्य सरकार्यवाह सुरेश (भय्याजी) जोशी


$img_titleभ्रष्टाचार के विरोध में चल रहे आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहभागिता को लेकर चलाई जाने वाली चर्चा दुर्भावनापूर्ण है एवं इस आंदोलन को दुर्बल करने के राजनीतिक षड्यंत्र को ही प्रकट करती है। 

श्री अण्णा हजारे ध्येय समर्पित व्यक्ति हैं। देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले कई महीनों से एक व्यापक जन आंदोलन का वह सफलतापूर्वक नेतृत्व भी करते आए हैं। इस आंदोलन की सफलता का श्रेय भी उन्ही को मिलता है। कई अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रमों में उनके द्वारा व्यक्त विचार एवं उनके द्वारा किए गए विकासात्मक कार्यों से मैं और देशभर के हजारों कार्यकर्ता परिचित हैं एवं प्रभावित भी हैं। परन्तु कांग्रेस के महासचिव द्वारा षड्यंत्रपूर्वक उठाए गए निरर्थक विवाद के उत्तर के रूप में प्रसार माध्यम में प्रकशित श्री अण्णा हजारे जी द्वारा लिखे पत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूज्य सरसंघचालक मोहन राव भागवत जी के संदर्भ में व्यक्त किए गए विचार एवं आंदोलन के समर्थन में मेरे द्वारा भेजे गए पत्र को षड्यंत्र के रूप में देखना यह मेरे समझ के परे है, वेदना दायक है। श्री अण्णा हजारे जी जैसे व्यक्ति भी कुटिल राजनीतिक चाल से प्रभावित हो गए यह खेदजनक है। पत्र द्वारा व्यक्त इस प्रकार की टिप्पणियां भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को ही दुर्बल करने वाली सिद्ध होगी। यह दुर्भाग्य पूर्ण है। 

देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो यह संघ के स्वयंसेवकों सहित करोड़ों देशवासियों की आकांक्षा है। इस उद्देश्य से चलने वाले ऐसे आंदोलनों को ओछी, निम्न स्तर की कुटिल, विकृत राजनीति से सुरक्षित रखने का दायित्व आंदोलन के नेतृत्व का ही रहता है। 

राष्ट्रहित की भावनाओं के साथ सभी आंदोलनों में सहभागी होने वाला जनसामान्य भी ऐसी राजनीतिक षड्यंत्रों से आहत होता है, अतः नेतृत्व को सावधान, सजग रहना चाहिए। जनसामान्य निराष-हताष होता है तो दायित्व किसका होगा ? सभी राष्ट्रवादी व्यक्तियों को सामूहिकता से ऐसे प्रयासों को विफल करना चाहिए। भ्रष्टाचार के विरोध में चल रही यह लड़ाई सफल होने से ही देश के भ्रष्टाचार मुक्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा। 


15-10-2011 सुरेश (भय्याजी) जोशी

सरकार्यवाह (रा.स्व.संघ)