2000-2010

2009

• Pujaniya Sarsanghachalak K.S. Sudershan ji named Dr. Mohan Bhagwat as the next Sarsanghchalak of the Sangh.

Ma. Suresh Bhaiyyaji Joshi elected as the Sarkaryavaha of the Sangh.

‘Vishwa Mangal Gau Grama Yatra’ was launched by prominent Saints and supported by the Sangh in order to create extensive awareness amongst the people about the importance of cow protection, village centric agriculture.

Signatures of 8.34 crore citizens in support of the cause including those of 75,668 Christians and 10,73,142 Muslims were collected, contact programs in 23,300 villages were held and participated by 11,32,117 people. 201 MPs and 867 MLAs signed in support of the cause.Supporting ‘Local Yatras’ were conducted at 1,23,796 centers attended by 1,48,46,274 citizens. The Yatra covered a distance of 26000 Km. 9271 full time activists and 141035 others, a total of 150306 participants made the yatra successful. This Yatra was launched on 28 September 2009 from Kurukshetra concluded on 17 January 2010 at Nagpur.

 

2007

1857 की 150वीं वर्षगांठ पर विविध स्थानों पर संघ स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम किए।
तृतीय विश्व हिंदु सम्मेलन।
श्री गुरुजी जन्मशताब्दी के देशभर के कार्यक्रमों का दिल्ली में विशाल हिंदु सम्मेलन से समापन। पुरे भारत में हिंदु सम्मेलनों में 1 करोड़ 60 लाख हिंदुओं का सहभाग। समरसता सम्मेलनों में 13,000 संत और विविध जाति संप्रदायों के 1,80,000 सामाजिक नेताओं का सहभाग।

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150th Year of 1857 was celebrated by Swayamsevaks.
Third World Hindu Conference.
Concluding ceremony of Shri Guruji Janmashatabdi in Delhi. 1 Crore 60 lakh people, 13,000 saints and 1,80,000 social activists participated in Hindu Sammelans throughout the year.

 

2006

अतिवृष्टि से सूरत में बाढ़। स्वयंसेवकों ने 4,000 बाढ़ ग्रस्त परिवारों की सहायता की।
पूर्व आंध्र में बाढ़ के कारण पीड़ित 2,000 परिवारों के लिए संघ का राहत शिबिर।
श्री गुरुजी जन्मशताब्दी के निमित्त पुरे देशभर में हिंदु सम्मेलन, समरसता बैठकों का आयोजन।

 

2005

श्री शेषाद्रि जी का देहावसान।
अखिल भारतीय दृष्टिहीन कल्याण संघ का राष्ट्रीय सम्मेलन।

 

2004

श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का देहावसान।
26 दिसम्बर सुनामी के कारण भारत के तटवर्ती क्षेत्रों में बड़ी हानि। केवल कुछ घंटों के बाद स्वयंसेवकों का राहत कार्य प्रारंभ।

 

2003

श्री मोरोपंत पिंगले का देहावसान।
श्री रज्जू भैय्या का देहावसान।
10 फरवरी श्री चमनलाल जी का देहावसान।
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार शीर्षक से डॉक्टर जी की जीवनी भारत सरकार द्वारा ‘आधुनिक भारत के निर्माता’ मालिका में प्रकाशित।

 

2002

दक्षिण कर्नाटक का प्रांतीय शिबिर ‘समरसता संगम’ बंगलोर में हुआ। 39,000 स्वयंसेवक उपस्थित।
17 नवम्बर दिल्ली में 25,000 स्वयंसेवकों का गणवेश में सम्मेलन।

 

2001

26 जनवरी गुजरात में बहुत भयंकर भूकंप। प्रारंभ से लेकर परिस्थिती सामान्य होने तक स्वयंसेवक सेवा कार्यों में सक्रीय। विविध प्रकार के कार्यों में 35,000 से भी ज्यादा स्वयंसेवक सक्रिय।
जयपुर में ‘राष्ट्र शक्ती संगम’ नाम से स्वयंसेवकों का पथ संचलन। 51,000 स्वयंसेवक सहभागी।

 

2000

जनवरी गुजरात प्रांत का 3 दिवसीय प्रांतिक शिबिर, ‘संकल्प शिबिर’ संपन्न। 16,000 स्वयंसेवक गणवेश में सहभागी।
10 मार्च श्री के. एस. सुदर्शनजी सरसंघचालक मनोनीत हुए।
श्री मोहनजी भागवत सरकार्यवाह के दायित्व पर चुने गए।
संघ की 75वीं वर्ष पूर्ति पर, संघ का संदेश हर घर तक पहुँचाने के लिए व्यापक संपर्क अभियान।
अक्तूबर आगरा में ब्रज प्रांत का राष्ट्र रक्षा महाशिबिर 49,000 स्वयंसेवकों का सहभाग।