The emergency era The Sangh played a vital and decisive role in restoring democracy

1979

द्वितीय विश्व हिंदू सम्मेलन। दलाई लामा तथा विश्व के कई मान्यवर हिंदू धर्म गुरुओं का सहभाग।
अगस्त में मोरवी के नजदीक मच्छू बांध के फटने से मोरवी में प्रलय। स्वयंसेवकों ने शीघ्र राहत पहुँचाते हुए 12,000 परिवारों की आवश्यक सहायता की।


Second VHP vishwa Sammelan. Dalai Lama and many prominent religious leaders all over the world participated.
In August month, Machhu dam near Morvi, Gujarath, burst causing floods. Swayamsevaks helped 12,000 families in distress.

 

1978

30 सितम्बर सरकार्यवाह श्री माधवराव मुले, का देहावसान।
श्री राजेंद्र सिंह जी नए सरकार्यवाह बने।
मध्यभारत प्रांत शिबिर इंदौर में आयोजित। 6,000 स्वयंसेवक उपस्थित।
मई में राजस्थान के भरतपुर जिले में भारी बाढ़। राहत कार्यों में स्वयंसेवकों ने भोजन वितरण तथा 3,000 गरम कंबल (Blankets) वितरित किए।
भारतीय किसान संघ की स्थापना।


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Sri Madhava Rao Moole, Sarkayavaha, passed away on September 30.

 
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Sri Rajendra Singh was elected as Sarkayavaha.
Deen Dayal Sodh Sanstan was launched.
Madhya Bharat prant shibir Indore 1978.Attendance 6000.

 

1977

भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय। चुनावों में काँग्रेस को पराभूत कर जनता पार्टी सत्ता में।
22 मार्च संघ पर प्रतिबंध हटा।
श्री राजेन्द्र सिंह-रज्जूभैय्या को संघ के सहसरकार्यवाह के दायित्व पर मनोनित किया गया।
3 नवम्बर पटना में संघ स्वयंसेवकों के सामने लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी का उद्बोधन।
3 से 5 नवम्बर पंजाब प्रांत का प्रांतिक शिबिर संपन्न।
दिसम्बर तटीय आंध्र प्रदेश को चक्रवात का झटका। बड़ी मात्रा में जीवन की हानि। विपरीत परिस्थितियों में राहत कार्य करते हुए स्वयंसेवकों ने 2,40,000 कपड़े तथा 32,000 बर्तन संच वितरित किए। वैद्यकीय सुविधा तथा भोजन वितरण किया।

Bharatiya Jana Sangh was merged in newly formed Janta Party which came to power.
Government lifted ban on Sangh on March 22.
Jayprakash Narayan addressed the RSS meeting in Patna on November 3.
Cyclone hit coastal areas of AP in December resuting massive human loss. Swayamsevaks worked in relief operations under adverse conditions. 2,40,000 clothes and 32000 utensils were distributed.
Sri Rajendra Sinh was designated as Saha Sarkaryavaha - Joint General Secretary.

 

1975

25 जून श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत में आपातकाल लागू करने की घोषणा की।
27 जून श्री बालासाहब देवरस ने एक पत्रक द्वारा आपातकाल की चुनौती को स्वीकारने का स्वयंसेवकों को आवाहन किया।
4 जुलाई संघ पर दुसरा प्रतिबंध। देशभर में संघ के 1356 प्रचारकों में से 189 को कारावास भेजा गया। सरसंघचालक श्री देवरस सहित कई कार्यकर्ताओं को कारावास।
लोक संघर्ष समिति की स्थापना। लो. सं.समिति द्वारा आयोजित आपातकाल विरोधी संघर्ष में, 1 लाख से भी ज्यादा स्वयंसेवकों का सत्याग्रह तथा कारावास।


Emergency was imposed in the country by Smt.Indira Gandhi on June 25.
Sangh was banned for the second time on July 4.
Akhil Bharatiya Lok Sangharshana Samiti was launched to fight against Emergency.
Balasaheb was arrested. Many sangh leaders worked underground.

 

1974

छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक के 300वें वर्ष पर संघ द्वारा पूरे भारत में कार्यक्रमों का आयोजन।
Tri-Centenary Celebrations of coronation of Chatrapati Shivaji Maharaj.

 

1973

5 जून श्री गुरुजी का देहावसान।
6 जून श्री बालासाहब देवरस तृतीय सरसंघचालक के दायित्व पर मनोनित।
श्री माधवराव मुले सरकार्यवाह चुने गए।


 
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Memoir of Shri Guruji in front of Dr. Hedgewar Smruti Mandir
Sri Guruji passed away on June 5.
Sri Balasaheb Deoras was designated as 3rd Sarsangh Chalak on June 6.
Shri. Mahavrao Muley was elected as Sarkaryavah.

 

1972

दीनदयाल शोध संस्थान का शिलान्यास समारोह दिल्ली में श्री गुरुजी के हाथों से हुआ।
बाबासाहब आपटे का देहावसान।
कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला न्यास का महामहिम राष्ट्रपति वी.वी. गिरी द्वारा अनावरण।
महाराष्ट्र के 4500 गाँव तीव्र अकाल से ग्रस्त। ‘महाराष्ट्र दुष्काल विमोचन समिति’ के माध्यम से स्वयंसेवकों ने राहत पहुँचायी।
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की स्थापना।

Deen Dayal Shodh Sansthan was started.
Babasaheb Apte passed away.

 
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Vivekananda Rock Memorial in Kanyakumari was inaugurated by the then President of India, Sri V.V.Giri.

 

1971

विदर्भ-नागपुर प्रांतों का प्रांतिक शिबिर संपन्न। 10,000 स्वयंसेवक उपस्थित।
पाकिस्तान से युद्ध। स्वयंसेवकों ने नागरी सहायता कार्यों में पूरा सहयोग किया।


Vidarbha-Nagpur Prantik Shibir was held, attended by More than 10000 Swayamsevaks.
War with Pakistan broke out for the third time. Swayamsevaks took active part in hepling the armed forces.