'RSS conducts 1,60,000 sewa activities across the nation' Ma Bhaiyyaji Joshi


 

 Lucknow, October 20, 2014  

Relief work is ingrained in the very style of work of the Sangh. The disaster relief provided by the Sangh in Jammu and Kashmir, is an example of oneness. The Sangh also conducts service activities among backward, underprivileged and tribal sections of society. Nearly one lakh sixty thousand service activities are being run by swayamsevaks. This was revealed by the Sarkaryavaha of the Rashtriya Swayamsevak Sangh, Suresh Joshi (Bhaiyya ji Joshi), who was talking to journalists after the session of the All India Central Executive Committee of the Sangh.  

He said that the environmental problem is serious.  The work of increasing awareness in society about water conservation and tree planting will be taken up on a priority basis. Training camps will also be organized for this purpose.   Speaking about the recent political changes in the country, he said that the people of the country have demonstrated their vigilance to the world. The people of Bharat can make proper decisions even in difficult circumstances. He said that the previous regime did not function in the national interest. People wanted change.  The Sangh had supported the desire for change in the national interest by urging people to ensure 100 percent voting.

He acknowledged that many people, caught up in prejudices, criticize the Sangh. But since the society does not accept this, the Sangh is expanding rapidly. This year, 1.25 lakh youth participated in the primary training class. The activities of the Sangh are spreading to distant villages. The Sangh welcomes even people other than Hindus who join the Sangh.  

Answering a question, Bhaiyya ji said that Sangh wanted to rouse the consciousness of Hindus. Society has to become strong. Only then can the country become strong. When asked, ‘who is a Hindu?’, he said that one who calls himself a Hindu is a Hindu. There is no difference on account of forms of worship in this view.

Expounding on the vision of rural development, Shri Bhaiyya ji said that if villagers develop their own plans, the administer can assist in their implementation. The Sangh’s conception of rural development includes the idea that villagers  be educated, care both for environment and health , that the village be beautiful, that there is no discrimination, that the needs of the village be largely met by the village itself  and cottage industries be strengthened.

The government has a special role to play in society. It should act in the interest of the people, set right the system and ensure security. On the other hand, the society itself should take the initiative for removing social evils. It should not depend on the state.   

Asked about the construction of Shri Ram Temple, Bhaiyya ji said that the Ram temple is already there, and systematic worship being performed. What is needed now is to make it grand. The present government has declared in its election manifesto that it will remove the obstacles in the way of temple construction. For this, the government needs to be given some time.

 

लखनऊ, 20 अक्तूबर, 2014। राहत कार्य संघ की कार्यपद्धति में ही शामिल है। जम्मू-कश्मीर में संघ द्वारा की गयी आपदा सहायता वस्तुतः एकात्मकता की मिशाल है। समाज के दलितपिछड़े वनवासी क्षेत्र में भी संघ सेवा कार्य करता है। करीब लाख 60हजार सेवा केन्द्र स्वयंसेवकों के द्वारा चलाये जा रहे हैं। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी (भय्या जी जोशी) ने कहीजो कि संघ के अखिल भारतीय केन्द्रीय कार्यकारी मण्डल की बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण की समस्या गम्भीर है। समाज में जल संवर्द्धन एवं वृक्षारोपण को लेकर जागरुकता का कार्य प्राथमिकता के आधार पर लिया जायेगा। इसके लिए प्रशिक्षण शिविर भी चलाये जायेंगे। देश में हाल ही में हुए राजनीतिक परिवर्तन के सन्दर्भ में कहते समय उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों ने अपनी जागरूकता का परिचय विश्व को करा दिया। भारत की जनता कठिन परिस्थितियों में भी उचित निर्णय कर सकती है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार देश के लिए हितकारी नहीं थी। लोग परिवर्तन चाहते थे। संघ ने देश हित में परिवर्तन का समर्थन 100 प्रतिशत मतदान का देश के सामने आह्वान कर किया।


उन्होंने स्वीकार किया कि अनेक लोग पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर संघ की आलोचना करते हैं। लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करता इसलिए आज संघ का इतना विस्तार हो रहा है। इस वर्ष सवा लाख युवक प्राथमिक शिक्षा वर्ग में शामिल हुए। गांव-गांव तक संघ कार्य का विस्तार हो रहा है। हिन्दू के अलावा कोई अन्य लोग भी संघ में आते हैंतो संघ उनका स्वागत करता है।


एक प्रश्न के उत्तर में भैय्या जी ने बताया कि संघ हिन्दुओं को जाग्रत करना चाहता है। यह समाज शक्तिशाली होना चाहिए। तभी देश शक्तिशाली होगा। हिन्दू कौन हैयह पूछने पर उन्होंने कहा कि जो अपने आपको हिन्दू कहता है वह हिन्दू है। इसमें उपासना पद्धति का भेद नहीं।


ग्रामीण विकास की कल्पना को स्पष्ट करते हुए श्री भैय्या जी ने कहा कि गांव के लोग अपनी योजना खुद बनायें। उसके क्रियान्वयन में शासन का सहयोग हो सकता है। गांव के लोग शिक्षित हांेगांव सुन्दर होइसमें पर्यावरणचिकित्सा आदि शामिल हो। भेदभाव ना होगांव की आवश्यकता गांव में ही पूरी हो। कुटीर उद्योग बढ़ने चाहिए। यह संघ की ग्रामीण विकास के सम्बन्ध की अवधारणाहै।


समाज में शासन की विशेष भूमिका होती है। वह जनहित में कार्य करें। उनकी व्यवस्था ठीक करें,सुरक्षा सुनिश्चित करे। जबकि समाज के दोष दूर करने के लिए समाज ने स्वयं पहल करनी चाहिए। सरकारपर निर्भर नहीं होना चाहिए।



श्री राम मन्दिर निर्माण के सम्बन्ध में पूछे गये प्रश्न के उत्तर में भैय्या जी ने कहा कि राम मन्दिर वहाँ है ही वहाँ नियमित पूजा भी होती है। अब उसे भव्य बनाने की आवश्यकता है। वर्तमान सरकार ने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि मन्दिर निर्माण की बाधाओं को दूर करेगी। इसके लिए सरकार को समय देना चाहिए।