अपनत्व की भावना से सेवा सर्वोपर - सरसंघचालक


आगरा 2 नवम्वर। ‘‘देश और समाज के लिए प्रेम, आत्मीयता और अपनेपन की भावना से सेवा कार्य किये जाने चाहिए, न कि किसी तरह का सम्मान पाने की भावना से। स्वाभाविक आत्मीयता से किया गया कठिन कार्य भी सरलता से हो जाता है, हमें हर पल अपने देश के हित तथा उसकी सुरक्षा को देखकर करना चाहिए। आज जिन्हें सम्मानित किया गया है ये सभी इसी भावना से कार्य कर रहे है,‘‘उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने ‘युवा संकल्प शिविर’’ के अधीश सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में व्यक्त किये।
उन्होने कहा कि अपना कार्य करने के लिए सम्मान पाने का भाव हममें आना ही नहीं चाहिए। अहंकार के भाव से हमें हर अपने से लड़ना पड़ता है।जो सेवा कार्य कोई सम्मान या पद प्राप्ति के लिए किया जाता है वह सही माने में उसमें आत्मीयता या अपनेपन का भाव नहीं होता।श्री भागवत ने आगे कई प्रसंगों के माध्यम से सच्ची सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए युवाओं से समाज तथा राष्ट्र के लिए जुट जाने का आह्वान किया। पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा सिर काटे जाने वाले मथुरा निवासी सेना के जवान हेमराज सिंह की विधवा धर्मवती देवी, यमुना बचाओ आन्दोलन चलाने वाले रमेश बाबा, वनवासी छात्रा कल्याण आश्रम रूद्रपुर की संचालिका वर्षा बहिन, नानाजी देशमुख ग्राम विकास प्रकल्प चित्रकूट के संचालक भरत पाठक, कुष्ठरोगियों के लिए कार्य कर रहे दिव्य प्रेम ,हरिद्वार के आशीष गौतम, विकलांगों के लिये कार्य करने वाली कल्याण करोति के सुनील शर्मा का सरसंघचालक मोहन भागवत जी द्वारा सम्मानित किया गया। मंच पर क्षेत्रसंचालक दर्शन लाल अरोडा, शिविर अधिकारी दुर्ग सिंह चैहान,डा. एपी सिंह प्रांत संघचालक आदि उपस्थित थेसम्मान समारोह समापन के पश्चात विलम्ब से पधारें जनरल वी.के.सिंह शिविर स्थित सरसंघचालक आवास पर सम्मान किया गया।
आगरा, 2 नवम्बर। ‘अपने देश में कभी नये विषयों पर किये जाने वाले शोधों पर चर्चा नहीं होती इसके विपरीत किसको कितना वेतन मिलता है इस पर जोरों से चर्चा होती है। इस मानसिकता से नये शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन नहीं मिलता। यदि युवा इन चार बातों पर ध्यान दे ंतो वो भी बडे से बडे लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है, प्रबल और सतत् प्रयास, सकारात्मक सोच, निरंतर अभ्यास एवं असीम धैर्य। उन्होंने कहा आज भी अच्छी शिक्षा पाने के लिए बड़ी बड़ी सुविधाजनक शिक्षण संस्थानों की नहीं, जुझारू विद्यार्थियों और अच्छे शिक्षकों की जरूरत है। जो स्वयं अभावों में रह कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके’’उक्त उद्गार ‘सुपर 50‘ के संस्थापक आनन्द कुमार ने आस्था सिटी में आयोजित युवा संकल्प शिविर में विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए पंडाल में कहे।उन्होंने युवाओं में उत्साह भरते हुए अपनी संस्था ‘सुपर 50‘ की स्थापना और उसके जरिए निःशुल्क शिक्षण, भोजन देकर निर्धनतम छात्र अनुपम शशिनारायण, राकेश, सन्तोष आदि के उदाहरण देते हुये उनकी आइऱ्. आई. टी. की परीक्षा में सफल होने और उनकी उच्चपदस्थ होने की चर्चा की। जिन्होने अपनी लगन और अथक प्रयास से अपने लक्ष्य को पाया और ये सभी किसी न किसी रूप में वर्तमान में देश सेवा में जुटे हैं।विद्यार्थियों को आगाह करते हुए कहा कि आप जातिवाद में न पडे, बुरे वक्त में कोई जातिवाद वाला काम नहीं आता। जब आपमें लक्ष्य को पाने की लगन होगी तो साधन कहीं न कहीं से प्राप्त हो ही जायेंगे। बिना धन की लालसा के अच्छे काम करने पर बुरे लोग तमाम बाधांये उत्पन्न करते हैं। स्वंय पर कोचिंग माफियाओं से धमकी और हमले भी हुये लेकिन वह अपने लक्ष्य से डिगे नहीं।आनन्द कुमार ने कहा हमारे पुराने विश्वविद्यालयों में विभिन्न देशों से लोग आते थे जहां उन्हे आध्यात्मिक शिक्षा दी जाती थी, जब कि अन्य मेे भौतिक, यही हमारे नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालयों की विशे’ाता थी। जहां से पढकर छात्र विद्वान बन कर निकले।ओलम्पिक की सूटिंग प्रतियोगिता में पदक विजेता सांसद कर्नल राजवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि लगन व दृढ इच्छा शक्ति से कठिन से कठिन लक्ष्य को पाया जा सकता है। आप अपनी सोच से जीतते है। ईश्वर ने सभी को कोई ना कोई शक्ति दी लेकिन आप अपनी लगन से उस शक्ति को प्रयोग में ला सकते हैं।आज दुनिया के लोगों कि ये धारणा बन गई है कि भारतीयो से भी कुछ न कुछ सीखा जा सकता है।दिव्य प्रेम मिशन हरिद्वार के आशीष चैहान ने कहा कि आज बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक गोर जरूर है लेकिन उन्हे चलाने व बढाने का श्रेय भारतीयों को जाता है इस अवसर पर मचंसीन थे डा. दुर्ग सिंह चैहान, श्री पूरन डाबर।