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2000

जनवरी गुजरात प्रांत का 3 दिवसीय प्रांतिक शिबिर, ‘संकल्प शिबिर’ संपन्न। 16,000 स्वयंसेवक गणवेश में सहभागी।

10 मार्च श्री के. एस. सुदर्शनजी सरसंघचालक मनोनीत हुए।

श्री मोहनजी भागवत सरकार्यवाह के दायित्व पर चुने गए।

संघ की 75वीं वर्ष पूर्ति पर, संघ का संदेश हर घर तक पहुँचाने के लिए व्यापक संपर्क अभियान।

अक्तूबर आगरा में ब्रज प्रांत का राष्ट्र रक्षा महाशिबिर 49,000 स्वयंसेवकों का सहभाग।

 

 

2001

26 जनवरी गुजरात में बहुत भयंकर भूकंप। प्रारंभ से लेकर परिस्थिती सामान्य होने तक स्वयंसेवक सेवा कार्यों में सक्रीय। विविध प्रकार के कार्यों में 35,000 से भी ज्यादा स्वयंसेवक सक्रिय।

जयपुर में ‘राष्ट्र शक्ती संगम’ नाम से स्वयंसेवकों का पथ संचलन। 51,000 स्वयंसेवक सहभागी।

 

 

2002

दक्षिण कर्नाटक का प्रांतीय शिबिर ‘समरसता संगम’ बंगलोर में हुआ। 39,000  स्वयंसेवक उपस्थित।

17 नवम्बर दिल्ली में 25,000 स्वयंसेवकों का गणवेश में सम्मेलन।

 

 

2003

श्री मोरोपंत पिंगले का देहावसान।

श्री रज्जू भैय्या का देहावसान।

10 फरवरी श्री चमनलाल जी का देहावसान।

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार शीर्षक से डॉक्टर जी की जीवनी भारत सरकार द्वारा ‘आधुनिक भारत के निर्माता’ मालिका में प्रकाशित।

 

2004

श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का देहावसान।

26 दिसम्बर सुनामी के कारण भारत के तटवर्ती क्षेत्रों में बड़ी हानि। केवल कुछ घंटों के बाद स्वयंसेवकों का राहत कार्य प्रारंभ।

 

 

2005

श्री शेषाद्रि जी का देहावसान।

अखिल भारतीय दृष्टिहीन कल्याण संघ का राष्ट्रीय सम्मेलन।

 

 

2006

अतिवृष्टि से सूरत में बाढ़। स्वयंसेवकों ने 4,000 बाढ़ ग्रस्त परिवारों की सहायता की।

पूर्व आंध्र में बाढ़ के कारण पीड़ित 2,000 परिवारों के लिए संघ का राहत शिबिर।

श्री गुरुजी जन्मशताब्दी के निमित्त पुरे देशभर में हिंदु सम्मेलन, समरसता बैठकों का आयोजन।

 

2007

1857 की 150वीं वर्षगांठ पर विविध स्थानों पर संघ स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम किए।

तृतीय विश्व हिंदु सम्मेलन।

श्री गुरुजी जन्मशताब्दी के देशभर के कार्यक्रमों का दिल्ली में विशाल हिंदु सम्मेलन से समापन।


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पुरे भारत में हिंदु सम्मेलनों में 1 करोड़ 60 लाख हिंदुओं का सहभाग। समरसता सम्मेलनों में 13,000 संत और विविध जाति संप्रदायों के 1,80,000 सामाजिक नेताओं का सहभाग।

 

1999

6 अगस्त NLFT के आतंकवादियों ने त्रिपुरा में चार संघ कार्यकर्ताओं का अपहरण किया। 2 करोड़ की फिरौती की माँग की। बाद में चारों को मार दिया गया।
28 अक्तूबर इस शतक के सबसे विध्वंसकारी चक्रवात से तटीय उड़िसा आहत हुआ। 10,000 लोगों की मौत हो गयी। उत्कल बिपन्न सहायता समिती के माध्यम से स्वयंसेवकों ने राहत कार्य के लिए भरसक प्रयास किए।

Tricentenary Celebrations of Khlasa Panth - the idelogical sect started by Sri Guru Gobind Singh, the 10th Guru of Sikhs - were inaugurated in April. Sangh appealed to all the swayamsevaks to celebrate this occasion.

 
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Four full time workers - Dinendranath Day, Shayamalkanti Sen, Shubhankar Chakravarti and Sudhayamay Datta - Pracharaks of Sangh were abducted in Tripura by NLFT militants on August 6 demanding a ransom of Rs.2 crores. Later all the four pracharaks were killed.

The most devastating cyclone of the century hit the Coast of Orissa on October 28 causing a human loss of 10,000 and Rs.1800 crore property loss. Sangh played the lead role under the banner of Utkal Bipanna Sahayata Samiti in relief and rehabilitation activities.

 

1998

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की 50वीं वर्ष पूर्ति पर मुंबई में अधिवेशन।
20, 21, 22 नवम्बर मेरठ ‘समरसता संगम’ शिबिर में 5,200 गांवों से 51,200 स्वयंसेवक उपस्थित।


Sarsangh Chalak Shri Rajju Bhayya visited Japan and performed bhumi puja for the construction of Indo-Japan Cultural Centre on   April 17.

Golden Jubilee Celebrations of ABVP were inaugurated in Mumbai on December 25.

 

1997

9 फरवरी, उज्जैन, मध्य प्रदेश में, विराट सम्मेलन में 35,000 स्वयंसेवकों का पथ संचलन।
गुजरात में बाढ़ के समय स्वयंसेवक सहायता के लिए सक्रीय।
लुधियाना, पंजाब में स्वर्ण जयंती संघ समागम में 21,000 स्वयंसेवकों का गणवेश में सम्मेलन।


Sarsangchalak Sri Rajju Bhayya toured Kenya on the invitation of Hindu Council of Kenya from January 10th to 17th. During his visit Shri Rajju Bhayya addressed many gatherings of Indian familities, university students and met many government officials.

Golden Jubilee Sangh Samagam, Ludhiyana 21,000 Swayamsevaks gathering for one day.

 

1996

17 जून श्री बालासाहब देवरस का देहावसान।
नवम्बर आंध्र के गोदावरी जिले पर तीव्र चक्रवात का आघात। 900 लोगों की मृत्यु तथा भीषण हानि। जन संक्षेम समिती द्वारा संघ का राहत कार्य।
हरियाणा में चरखा-दादरी में विमान दुर्घटना ग्रस्त, 350 प्रवासियों की मौत। तत्काल सहायता करने वालों में संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका की मीडिया द्वारा सराहना।

Sri Balasheb Deoras passed away on June 17.

Severe Cyclone hit the Godavari Districts of Andhra Pradesh in November causing 900 deaths and massive property loss. Sangh participated actively in the relief operations under the banner of Jana Sankshema Samiti.

Plane crash in Chakri Dadri, Haryana leaving 350 dead. Sangh's remarkable role in the relief operations were praised by the international press particularly the Gulf press.

 

1994

11 मार्च प्रो. राजेंद्र सिंह - रज्जूभैय्या - सरसंघचालक घोषित हुए।
संघ के अखिल भारतीय सेवा विभाग का प्रारंभ। लघु उद्योग भारती का गठन।


Prof. Rajendra Singh - Rajju Bhayya - was designated as 4th Sarsangh Chalak of Sangh on March 11.

A.B. Seva Vibhag Started.

 

1993

4 जून शासन द्वारा नियुक्त न्यायाधिकरण ने संघ पर प्रतिबंध को गलत ठहराते हुए निरस्त किया।
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद का गठन।

Bahri Tribunal absolved Sangh of destruction of Babri Structure and the ban was lifted on June 4.

 

1992

14 मई श्री. भाऊराव देवरस का देहावसान।
20 अगस्त श्री यादवराव जोशी का देहावसान।
6 दिसम्बर बाबरी ढांचा कारसेवकों द्वारा ध्वस्त।
10 दिसम्बर संघ पर तृतीय प्रतिबंध।
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का गठन।


Sri Bhavu Rao Desoras passed away on May 14.

Sri Yadavrao Joshi passed away on August 20.

Babri structure on Ram Janmabhoomi was removed by karsevaks on December 6.

Government banned Sangh for the third time on December 10.

 

1990

30 अक्तूबर मुलायम सिंह शासन के सारे प्रतिबंधो के बावजूद अयोध्या में कारसेवा।

Karseva was held in Ram Janmabhoomi in Ayodhya on October 30 daring all kinds of restrictions imposed by Mulayam Singh government.

1989


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On June 25 the terrorist attack on an RSS Shakha in Moga Town, Punjab resulted in loss of lives of 18 Swayamsevaks and 6 others. 28 others were injured.

1988

डॉ. हेडगेवार जन्मशताब्दि निमित्त व्यापक जनसंपर्क अभियान, 76,000 सभाएँ तथा 15 करोड़ लोगों से संपर्क। डॉ. हेडगेवार स्मारक सेवा समिती द्वारा सेवा कार्यों के लिए 11 करोड़ का धन संकलन।

Jana Samparka Abhiyan was launched on the eve of Centeary Celbrations of Dr.Hedgewar. Syawaymsevaks contacted 1,50,000 famililies, conducted 76,000 meetings and collected 11 crore rupess towards Seva Nidhi.

 

1987

6 दिसम्बर सरसंघचालक श्री. देवरस जी का मुंबई चैत्यभूमि में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की स्मृति को अभिवादन।
शेषाद्रिजी सरकार्यवाह चुने गए।
गुजरात में पड़े अकाल से 18,000 में से 15,000 गाँव पीड़ित। सहायता पहुँचाने के लिए स्वंयसेवकों ने दुष्काल पीड़ित सहायता समिती बनायी। व्यापक सहायता के साथ गोवंश की रक्षा पर विशेष ध्यान दिया। 123 राहत केंद्रों में 1,45,310 गोवंश का रक्षण किया।
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Sheshadriji was elected Sarkaryavah.
Sri Balasaheb Deoras, Sarsanghchalak visited Chaitya Bhoomi On 6th December to pay his homage to the memory of late Dr. Ambedkar.

1986

त्रिवेंद्रम में हिंदु संगम का आयोजन।
संघ के कार्यकारी मंडल द्वारा, खालिस्तानवादी आतंकवादियों के हिंसा का निषेध। सिक्ख तथा अन्य हिंदुओं में सामंजस्य का आवाहन।
राष्ट्रीय सिक्ख संगत की स्थापना।


Hindu Sangam was held at Trivandram.

1985

संघ के 60 साल पुरे होने के उपलक्ष्य में व्यापक जनसंपर्क अभियान।

Sangh completed 60 years. Nation-wide awareness programmes were conducted.

1984

अक्तूबर श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई हिंसा में सिक्ख बंधुओं की बड़ी हानि। स्वयंसेवकों ने अपने घरों में आश्रय देकर तथा राहत शिबिर चलाकर सीक्ख बंधुओं की सहायता की।

Massive human and property loss to Sikhs in Delhi in the wake of the assassination of Smt.Indira Gandhi in October. Hundreds of Sikh families were given protection in Swayamsevaks' homes; relief camps were set up for the needy and necessary service rendered at their homes in Delhi and other parts of the country.

Reconstruction of Golden Temple after Operation Blue-Star. Swayamsevaks in large number participatated in the Karseva at Golden Temple in Amritsar.

1983

विश्व हिंदु परिषद द्वारा पुरे देश में एकात्मता यज्ञ रथ यात्रा का आयोजन। स्वयंसेवकों का सक्रिय सहभाग।
13 से 15 जनवरी महाराष्ट्र प्रांत का प्रांतिक शिबिर आयोजित। 35,000 स्वयंसेवक उपस्थित।
असम  में जातीय दंगे। स्वयंसेवकों ने 5,000 से भी अधिक दंगा ग्रस्त परिवारों की सहायता की।


Ekatmata Yajna was launched by Vishwa Hindu Parishad with active support of Swyamseveks for rousing the peoples' faith and devotion to Bharat Mata and Ganga Mata.

Maharashtra Prantik Shibir held at Pune. Attendance more than 35,000.

1982

कर्नाटक प्रांतिक शिबिर का बंगलोर में आयोजन 25,000 स्वयंसेवकों की उपस्थिति।

1982 Karnataka Prantik Shibir was held at Bangalore. Attendance more than 25000.

1981

मीनाक्षीपुरम्, तमिलनाडु में 800 हिंदुओं का इस्लाम में सामूहिक मतांतरण। विविध हिंदू संघटनों के साथ संघ ने इसका विरोध किया तथा मतांतरण के खतरे के बारे में पुरे भारत में जनजागृति अभियान में सहभाग दिया।
संस्कार भारती का गठन।


Islamic mass conversion of about 800 Hindus in February in Meenakshipuram in Tamilnadu. Sangh along with other Hindu organisations protested these conversions in Meenakshipuram and other parts of Tamilnadu, and held an awareness campaign against religious conversions.

1980

संघ का व्यापक जन संपर्क अभियान। 95,000 गाँवों में 1 करोड़ परिवारों से संपर्क किया।

 Sangh launched mass public contact programme - Jana samparka abhiyan - covering 95000 villages and 1 crore families.

 Janata party leaders insisted that no RSS member can become a Janata party member at the same time. Bharatiya Janata Party was formed over this dual membership issue.

1979

द्वितीय विश्व हिंदू सम्मेलन। दलाई लामा तथा विश्व के कई मान्यवर हिंदू धर्म गुरुओं का सहभाग।
अगस्त मोरवी के नजदीक मच्छू बांध के फटने से मोरवी में प्रलय। स्वयंसेवकों ने शीघ्र राहत पहुँचाते हुए 12,000 परिवारों की आवश्यक सहायता की।


Second VHP vishwa Sammelan. Dalai Lama and many prominent religious leaders all over the world participated.

1978

30 सितम्बर सरकार्यवाह श्री माधवराव मुले, का देहावसान।
श्री राजेंद्र सिंह जी नए सरकार्यवाह बने।
मध्यभारत प्रांत शिबिर इंदौर में आयोजित। 6,000 स्वयंसेवक उपस्थित।
मई में राजस्थान के भरतपुर जिले में भारी बाढ़। राहत कार्यों में स्वयंसेवकों ने भोजन वितरण तथा 3,000 गरम कंबल (Blankets) वितरित किए।
भारतीय किसान संघ की स्थापना।

 

Shahi Imam of Jama Masjid visited Shakha in Fazilka in Punjab.


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Sri Madhava Rao Moole, Sarkayavaha, passed away on September 30.

 
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Sri Rajendra Sinh was elected as Sarkayavaha.

Deen Dayal Sodh Sanstan was launched.

Madhya Bharat prant shibir Indore 1978. Attendance 6000.

1977

भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय। चुनावों में काँग्रेस को पराभूत कर जनता पार्टी सत्ता में।
22 मार्च संघ पर प्रतिबंध हटा।
श्री राजेन्द्र सिंह-रज्जूभैय्या को संघ के सहसरकार्यवाह के दायित्व पर मनोनित किया गया।
3 नवम्बर पटना में संघ स्वयंसेवकों के सामने लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी का उद्बोधन।
3 से 5 नवम्बर पंजाब प्रांत का प्रांतिक शिबिर संपन्न।
दिसम्बर तटीय आंध्र प्रदेश को चक्रवात का झटका। बड़ी मात्रा में जीवन की हानि। विपरीत परिस्थितियों में राहत कार्य करते हुए स्वयंसेवकों ने 2,40,000 कपड़े तथा 32,000 बर्तन संच वितरित किए। वैद्यकीय सुविधा तथा भोजन वितरण किया।

 



Bharatiya Jana Sangh was merged in newly formed Janta Party which came to power.
Government lifted ban on Sangh on March 22.

Jayprakash Narayan addressed the RSS meeting in Patna on November 3.

Cyclone hit coastal areas of AP in December resuting massive human loss. Swayamsevaks worked in relief operations under adverse conditions. 2,40,000 clothes and 32000 utensils were distributed.

Sri Rajendra Sinh was designated as Saha Sarkaryavaha - Joint General Secretary - of Sangh.

1975

25 जून श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत में आपातकाल लागू करने की घोषणा की।
27 जून श्री बालासाहब देवरस ने एक पत्रक द्वारा आपातकाल की चुनौती को स्वीकारने का स्वयंसेवकों को आवाहन किया।
4 जुलाई संघ पर दुसरा प्रतिबंध। देशभर में संघ के 1356 प्रचारकों में से 189 को कारावास भेजा गया। सरसंघचालक श्री देवरस सहित कई कार्यकर्ताओं को कारावास।
लोक संघर्ष समिति की स्थापना। लो. सं. समिति द्वारा आयोजित आपातकाल विरोधी संघर्ष में, 1 लाख से भी ज्यादा स्वयंसेवकों का सत्याग्रह तथा कारावास।


Emergency was imposed in the country by Smt.Indira Gandhi on June 25.

Sangh was banned for the second time on July 4.

Akhil Bharatiya Lok Sangharshana Samiti was launched to fight against Emergency.

Balasaheb was arrested. Many sangh leaders worked underground.

1974

छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक के 300वें वर्ष पर संघ द्वारा पूरे भारत में कार्यक्रमों का आयोजन।

 

Tri-Centenary Celebrations of coronation of Chatrapati Shivaji Maharaj.

1973

5 जून श्री गुरुजी का देहावसान।
6 जून श्री बालासाहब देवरस तृतीय सरसंघचालक के दायित्व पर मनोनित।
श्री माधवराव मुले सरकार्यवाह चुने गए।


 
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Memoir of Shri Guruji in front of Dr. Hedgewar Smruti Mandir

Sri Guruji passed away on June 5.

Sri Balasaheb Deoras was designated as 3rd Sarsangh Chalak on June 6.

Shri. Mahavrao Muley was elected as Sarkaryavah.

1972

दीनदयाल शोध संस्थान का शिलान्यास समारोह दिल्ली में श्री गुरुजी के   हाथों से हुआ।
बाबासाहब आपटे का देहावसान।
कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला न्यास का महामहिम राष्ट्रपति वी.वी. गिरी द्वारा अनावरण।
महाराष्ट्र के 4500 गाँव तीव्र अकाल से ग्रस्त। ‘महाराष्ट्र दुष्काल विमोचन समिति’ के माध्यम से स्वयंसेवकों ने राहत पहुँचायी।
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की स्थापना।

 



Deen Dayal Sodh Sansthan was started.

Babasaheb Apte passed away.

 
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Vivekananda Rock Memorial in Kanyakumari was inaugurated by the then President of India, Sri V.V.Giri.

1971

विदर्भ-नागपुर प्रांतों का प्रांतिक शिबिर संपन्न। 10,000 स्वयंसेवक उपस्थित।
पाकिस्तान से युद्ध। स्वयंसेवकों ने नागरी सहायता कार्यों में पूरा सहयोग किया।


Vidarbha-Nagpur Prantik Shibir was held, attended by More than 10000 Swayamsevaks.
War with Pakistan broke out for the third time. Swayamsevaks took active part in hepling the armed forces.

1968

मध्यभारत प्रांतिक शिबिर शाजापुर में।

Madhya Bharat Prantik Shibir in Shajapur.

1967

महाराष्ट्र प्रांतिक शिबिर में 10,000 स्वयंसेवक उपस्थित।

 Maharashtra Prantik Shibir was attended by more than 10000 Swayamsevaks.

1966

बिहार में अकाल। श्री जय प्रकाश नारायण द्वारा संघ के राहत कार्यों की सराहना।

 प्रथम विश्व हिंदु सम्मेलन प्रयाग में संपन्न।

 Drought in Bihar. Jayprakash Narayan was impressed with the selfless service of Swayamsevaks in relief opearions.

Ist Vishwa Hindu Sammelan at Prayag.

 

1965

पाकिस्तान का भारत पर आक्रमण। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री द्वारा श्री गुरुजी को सर्वदलीय सम्मेलन में सहभागिता का निमंत्रण। सम्मेलन में श्री गुरुजी द्वारा सभी प्रकार से पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन।
युद्ध के 22 दिनों तक, दिल्ली में, यातायात नियंत्रण जैसे आवश्यक नागरी कार्यों में स्वयंसेवकों का सहभाग। स्वयंसेवकों द्वारा सभी आवश्यक स्थानों पर रक्तदान।
श्री. मधुकर दत्तात्रय - बालासाहब - देवरस संघ के सरकार्यवाह पद पर चुने गए।
नागपुर-विदर्भ का प्रांतिक शिबिर 5,000 स्वयंसेवकों का सहभाग।
बंगलोर में राष्ट्रोत्थान परिषद की स्थापना।

 

Pakistan attacked Bharat. Lal Bahadur Shastri, the then Prime Minister, invited shri Guruji to attend the All-Leaders Conference in New Delhi. At the conference, Shri Guruji extended complete co-operation on behalf of the Sangh.
Sri Madhukar Dattatreya Deoras - Balasahebji - was elected as General Secretary - Sarkaryavaha - of Sangh.
Nagpur- Vidarbha Prantik Shibir was attended by more than 5000 Swayamsevaks.

1964

विश्व हिंदू परिषद की स्थापना।



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Viswa Hindu Parishad - VHP - was launched.

1963

संघ को 26 जनवरी के संचलन में सहभागिता का निमंत्रण। अल्प अवधी में 3,000 स्वयंसेवक गणवेश तथा घोष के साथ संचलन में सहभागी हुए।
विवेकानंद जन्मशताब्दि प्रारंभ। कन्याकुमारी में विवेकानंद का भव्य स्मारक बनाने की योजना को संघ का समर्थन।
श्री गुरुजी की नेपाल भेंट में, नेपाल महाराजा से हिंदु हित के विषयों पर चर्चा।


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RSS was invited to participate in the Republic Day Parade on January 26 in Delhi. 3000 swayamsevaks with full uniform and band participated in this parade within a short notice.

Vivekananda Centenary celebrations started. Sangh passed resolution to construct a grand memorial for Swami Vivekananda in Kanyakumari.

Shri Guruji visited Nepal, met the King and held intimate discussions with him about the problems confronting Hindus and Hinduism.

1962

चीन द्वारा भारत पर खुला आक्रमण। संघ ने सरकार को तथा विशेषतः जवानों को हर प्रकार की सहायता करने के लिए स्वयंसेवकों को सक्रिय किया।
जनरल करिअप्पा की संघ शाखा को भेंट।
श्री भैय्याजी दाणी फिर से सरकार्यवाह पद पर निर्वाचित।

 



Dr. Hedgewar memorial was inaugurated.

 
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General Kariyappa visited Shaka and was impressed with the disciplined route march of Swayamsevaks.
Shri Bhaiyyaji Dani was elected Sarkaryavah.
Chinese openly invaded our territory in 1962. Swayamsevaks swung into action mobilising support to the governmental measures in general and to the jawans in particular.

1956

श्री एकनाथजी रानडे सरकार्यवाह निर्वाचित हुए।
श्री गुरुजी के 51वें वर्धापन दिन के निमित्त से संघ का व्यक्ति-व्यक्ति से संपर्क कर के संघ का संदेश सुनाने का अभियान।
चीन के आक्रमण के बारें में भारत को सचेत करने वाला श्री गुरुजी का वक्तव्य।



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Shri Eknathji Ranade was elected Sarkaryavah.

1955

गोवा मुक्ति संग्राम में स्वयंसेवकों का प्रभावी सहभाग।

Swayamsevaks took leading part in the all-party struggle for the liberation of Goa from the control of Portugese.

Bharatiya Mazdoor sangh Started.

1954

2 अगस्त दादरा नगर हवेली को पुर्तगालियों के कब्जे से स्वयंसेवकों ने मुक्त किया तथा भारत सरकार को सौंप दिया।

Swayamsevaks liberated the Dadra and Nagar Haveli from Portugese control on August 2 and handed over the region to Central Government.

1953

3 जून श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी की काश्मीर के कारावास में अचानक मृत्यु। प्रजा परिषद के सत्याग्रह में सहभाग के कारण वे कारावास में थे।


Sudden demise of Sri Syama Prasada Mukherjee in
Kashmir on June 23.

1952

गोरक्षा आंदोलन का प्रारंभ। स्वयंसेवकों ने 1,75,39,813 स्वाक्षरियों का पुरे देशभर से संग्रह किया। महामहीम राष्ट्रपति महोदय को यह स्वाक्षरी संग्रह 8 दिसम्बर को प्रस्तुत किया गया।
जशपुर में वनवासी कल्याण आश्रम प्रारंभ।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ की स्थापना। कई स्वयंसेवक जनसंघ में सहभागी हुए।
स्वातंत्र्य वीर सावरकर के द्वारा भारत के स्वतंत्रता के लिए स्थापित ‘अभिनव भारत’ के समापन कार्यक्रम में श्री गुरुजी सहभागी हुए।

 

 




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Cow Protection Movement - Goraksha Andolan - was launched demanding prohibition of cow slaughter in the country. Swayamsevaks collected 1,75,39,813 signatures covering every part of the country from 85,000 cities and villages. All these signatures were presented to The President of Bharat, Dr. Rajendra Prasad, on 8 December.

Vanvasi Kalayan Asharam Started.

Bharatiya Jansangh was formed by Dr. Shyama Prasad Mukharjee and many Swayamsevaks joined it.


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Shri Guruji participated in the concluding ceremony of ‘Abhinav Bharat’ an organization which was founded by Swatantraya Veer Savarkar for the freedom of Bharat.

1950

26 जनवरी भारत प्रजासत्ताक घोषित हुआ। श्री गुरुजी ने स्वयंसेवकों को इस का स्वागत करने के लिए कहा।
मार्च प्रथम अखिल भारतीय प्रतिनिधी सभा की बैठक संपन्न।
श्री भैय्याजी दाणी सरकार्यवाह चुने गए।
पाकिस्तान से आए हुए हिंदू शरणार्थियों के लिए वास्तुहारा सहायता समिती का गठन। पुरे देशभर से सहायता एकत्र करके पहुँचायी गई।
असम में भुकंप तथा बाढ़। स्वयंसेवकों द्वारा राहत कार्य।

 



India became Republic on January 26. Shri Guruji instructed swayamsevaks to celebrate this occasion.

 
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March 1950. The first Akhil Bharatiya Pratinidhi Sabha was held. Bhaiyyaji Dani was elected Sarkaryavah [ general secretary].

Vastuhara Sahayata Samiti was started to help Hindu refugees from Pakistan.

Earth quake and floods in Assam. Swayamsevaks swung into action.

1949

12 जुलाई सरकार ने संघ पर लगा हुआ प्रतिबंध बिना शर्त हटाया।

13 जुलाई श्री गुरुजी कारावास से मुक्त। पुरे भारत की परिक्रमा में जनता ने उनका स्थान-स्थान पर भव्य स्वागत किया।

 

Sangh constitution was drafted.

Government lifted the ban unconditionally on July 12.

 
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Shri Guruji was released from Jail on July 13. A rousing welcome was given to him All over Bharat in his whirl wind tour.

Akhil Bharatiya Vidyardhi Parishad - ABVP - was launched for nation building through student power.

1948

30 जनवरी गांधी जी की हत्या। श्री गुरुजी ने शोक संदेश भेजा।
1 फरवरी श्री गुरुजी नागपुर में बंदी बनाए गए।
अंतरिम काँग्रेस सरकार ने संघ पर प्रतिबन्ध लगाया तथा 17,000 स्वयंसेवकों को बंदी बनाया।
6 दिसम्बर प्रशासन से संवाद विफल होने के बाद, स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह प्रारंभ किया। 1 जनवरी तक के सत्याग्रह पर्व में 60,000 स्वयंसेवक जेल गए।

 



Gandhiji was assassinated on January 30. Sangh expressed its deep condolences.

Shri Guruji was arrested on February 1 in Nagpur.

Independent Government blamed sangh for Gandhiji's murder , banned Sangh and arrested 17000 swayamsevaks on February 4.

Shri Guruji announced the closure of Sangh shakhas on February 5.
After the failure of talks with government, Swayamsevaks launched satyagraha demanding the removal of ban on Sangh on December 9.

1947

3 जून काँग्रेस ने विभाजन का प्रस्ताव स्वीकार किया। हिंदू समाज तथा स्वयंसेवकों को यह जबरदस्त आघात लगा। विभाजन की अपरिहार्यता देखकर संघ ने हिंदुओं को मुस्लिम अत्याचारों से बचाने पर लक्ष्य केंद्रित किया। 300 से भी अधिक सहायता शिबिर हिंदू शरणार्थियों के लिए चलाए।
15 अगस्त भारत स्वाधीन हुआ।
16 सितम्बर गांधी जी ने दिल्ली में 500 स्वयंसेवकों को संबोधित किया।
18 अक्तूबर श्री गुरुजी ने कश्मीर महाराजा हरिसिंह से भेंट करके उन्हें भारत में कश्मीर के विलय का आग्रह किया।
आर्गनाईजर तथा पाञ्चजन्य साप्ताहिकों का प्रारंभ।

 

Congress accepted for Partition on 3rd June which was a stunning blow to the Hindu people, and more so to the Sangh Swayamsevaks. Hindus were killed massively in Punjab and Bengal. Sangh organized 3000 relief camps.

Bharat secured independence on August 15.

Gandhiji addressed a gathering of 500 swayamsevaks in Bhangi colony of Delhi on Sept.14.

Shri Guruji flew to Srinagar on 17th October to advise the Maharaja of Kashmir to accede Kashmir into Bharat. Finally, the Maharaja expressed his readiness to sign the Instrument of Accession to Bharat. Shri Guruji returned to New Delhi on 19th October, and reported to Sardar Patel about the Maharaja's readiness to accede to Bharat.

In Kenya, Swayamsevaks started an organisation with the name
'Bharatiya Swayamsevak Sangh'.

' Organizer' and 'Panchajanya' weeklies were started to voice the Sangh opinion on various issues of national concern.

1946

16 अगस्त मुस्लिम लीग का ‘डायरेक्ट एक्शन’ आंदोलन। कलकत्ता में 5,000 हिंदुओं की हत्या तथा 15,000 जख्मी।

 Muslim League declared 'Direct Action' on August 16. 5000 Hindus were killed and 15000 thousand injured in Calcutta.

1942

कांग्रेस द्वारा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन। कई स्वयंसेवकों ने उसमें सक्रीय सहभाग दिया। अष्टी-चिमूर में स्वयंसेवकों का बलिदान। रामटेक के नगर कार्यवाह श्री. बालासाहब देशपांडे को फांसी की सजा (बाद में सामूहिक छूट में उनकी यह सजा रद्द हो गयी)।

 

Congress launched 'Quit India' agitation demanding Britishers to leave the country. Several Sangh workers took active part in it.

1940

वीर सावरकर ने पुणे प्रांतिक बैठक को संबोधित किया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने डॉक्टरजी से मिलकर बंगाल के हिंदुओं  की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की।
9 जून डॉक्टरजी ने नागपुर तृतीय वर्ष शिक्षार्थियों को समापन पर संबोधित किया। यह उनका अंतिम भाषण सिद्ध हुआ। इस वर्ग में देश के सभी प्रांतों से स्वयंसेवक शिक्षार्थी के रुप में आए थे।
सुभाषचंद्र बोस से 19 जून को डॉक्टरजी की भेंट पर डॉक्टरजी के बीमार अवस्था के कारण दर्शन करके वापसी।
21 जून डॉक्टरजी का देहावसान।
3 जुलाई श्री. माधव सदाशिव गोलवलकर ‘श्री गुरुजी’  को सरसंघचालक घोषित किया गया।

 

 Veer Savarkar visited RSS prantik Baithak in pune.

Doctor Shyama Prasada Mukherjee met Doctorji to express his concern over the plight of Hindus in Bengal.

British Government banned the Sangh uniform -ganavesh - and route march.

Sanskrit prayer - Prardhana - was introduced in place of Hindi&Marathi prayer.

Sanskrit instructions - ajnas -introduced in place of English instructions.

Subhas Bose visited Doctorji on his deathbed on June 20.

 
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Doctor Ji’s samadhi 1940

Doctorji passed away on June 21 at 9.27 am.

Madhav Sadasiva Golwalkar - Shri Guruji - was designated as Second Sarsangh Chalak on July 3.

1939

श्री गुरुजी को संघ का सरकार्यवाह घोषित किया।
हिंदी और मराठी प्रार्थना के स्थान पर संस्कृत प्रार्थना स्वीकृत।
संस्कृत में संपूर्ण आज्ञाएँ देना प्रारम्भ।



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Shri Guruji was designated as General Secretary -Sarkaryavaha - of Sangh.

1938

प्रथम और द्वितीय वर्ष की शिक्षा लाहौर में प्रारंभ।
सरकारी नौकरों को संघ में भाग लेने के लिए मुंबई प्रांतिक सरकार ने प्रतिबंधित किया।
डॉ. हेडगेवार पुणे की हिंदु युवक परिषद के अध्यक्ष।
दिसम्बर में नागपुर के शीत शिबिर को स्वातंत्र्यवीर सावरकर की भेंट।
भाग्यनगर मुक्ती संग्राम (हैदराबाद), में स्वयंसेवकों का सहभाग।


Bombay Presidency prohibited government employees from participating in RSS activities.


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Dr. Hedgewar presided over the Hindu Yuvak Parishad at Pune.

Savarkar visits Dec. 1938 Nagpur Camp.

Swyamsevaks Participated in 'Bhaganagar Mukti Sangram' satyagraha, [Hydrabad freedom movement] a movement against the Nizam rule and its Hindu repressive policies, 

1937

उत्तर प्रदेश में सघ कार्य प्रारंभ। 10 स्वयंसेवक इस हेतु नागपुर से उत्तर प्रदेश गए।
डॉक्टरजी का पुणे में मंदिर सत्याग्रह में सहभाग। वीर सावरकर जी की रत्नागिरी की स्थानबध्दता से पूर्ण मुक्तता। नागपुर शाखा द्वारा 12 दिसम्बर को उनका भव्य स्वागत।
स्वामी अखंडानंद से श्री गुरुजी ने सारगाछी दीक्षा में ग्रहण की। स्वामी अखंडानंद के देहावसान के बाद नागपुर वापस।

 

Sangh work started in Uttar Pradesh. Batch of 10 Swayamseveks was sent for the purpose.

Doctorji participated in  Pune  Mandir Ghanti Satyagraha.

Veer Savarkar released from Andaman Jail. He was given a rousing welcome by Nagpur Shakha 12 Dec.

1936

महाराष्ट्र में संघ कार्य का विस्तार।
वर्धा में विजयादशमी 25 अक्तूबर को राष्ट्र सेविका समिती की स्थापना।
पंजाब में संघ कार्य का प्रारंभ।


Sangh work started in other parts of Maharashtra.

Rashtra Sevika Samiti was formed on  Vijayadahmi, 25 Oct..

Sangh work started in Punjab.

1935

प्रथम और द्वितीय वर्ष का अधिकारी शिक्षण वर्ग पुणे में प्रारंभ। नागपुर के बाहर का प्रथम ऐसा वर्ग।
महाकौशल क्षेत्र में संघ विस्तार के लिए डॉक्टरजी ने स्वयंसेवकों को भेजा।


Doctorji deputed swayamsevks to spread the message of Snagh in Mahakosal - Central Province.

1934

सरकारी नौकरों को संघ में भाग लेने के लिए प्रतिबंधित करने वाला अध्यादेश, मध्य प्रांत असेंब्ली ने बहुमत से निरस्त किया।
वर्धा के संघ शिबिर को गांधी जी की भेंट।
डॉक्टरजी तथा अप्पाजी जोशी की गांधी जी से भेंट तथा संघ के बारें में चर्चा।
नागपुर के रेशिम बाग संघ स्थान को डॉक्टरजी ने खरीदा।
श्री गुरुजी नागपुर शाखा के कार्यवाह घोषित हुए।

 

The order prohibiting Government employees from participating in RSS was defeated in the legislative assembly.

Gandhiji Visited the winter camp - Hemant Shibir - in Vardha. He offered his salute to Bhagavadhwaj.

Doctorji with Appaji Joshi met Gandhiji and explained him about Sangh and its objectives.

Doctorji purchsed Reshembhag ground in Nagpur which became the Head Quarters for Sangh activities.

Shri Guruji was designated as secretary - Karyavaha - of Nagpur Shakha.

1932

15 दिसम्बर मध्य प्रान्त सरकार ने सरकारी नौकरों को संघ में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया।

 Central Province Government issued orders on December 15 prohibiting government employees from participating in RSS.

1931

फरबरी 14 डॉक्टरजी जेल से मुक्त।
डॉक्टरजी ने बनारस में शाखा प्रारंभ की।
श्री. भैय्याजी दाणी के प्रयास से श्री गुरुजी का बनारस संघ शाखा में आना प्रारंभ हुआ।
बालाजी हुद्दार, उस समय के सरकार्यवाह, तथा उनके सहयोगियों को बालाघाट केस में गिरफ्तार । सरकारी खजाना लूटने के प्रयास का आरोप।

 Doctorji was freed from Jail on February 14.

Doctorji Started Shakha in Benares.

 
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Guruji at benares

Sri Bhayyaji Dhani introduced Madhav Sadasiva Golwalkar - Shri Guruji - to shakha in Benares.

1930

काँग्रेस ने संपूर्ण स्वातंत्र्य का प्रस्ताव पारित किया। डॉक्टरजी ने सभी संघ शाखाओं को 26 जनवरी को पूर्ण स्वातंत्र्य दिन मनाने के लिए कहा।
डॉक्टरजी ने तथा कई स्वयंसेवकों ने जंगल सत्याग्रह में भाग लिया। डॉक्टरजी को 9 माह का कारावास। सत्याग्रह में जाने से पहले डॉक्टरजी ने सरसंघचालक का दायित्व डॉ. ल. वा. परांजपे को सौंपा।
गणवेश में खाकी टोपी की जगह काली टोपी आ गयी।

 



Congress passed a resolution proclaiming Complete Independece - Purna Swaraj. Doctorji instructed all shakhas to celebrate 26 January 1930 as Independence Day.
Doctorji with several swayamsevaks participated in Jungle Satyagraha and was jailed.Dr.L.V.Paranjape was designated as Sarsangh Chalak.

Black cap was introuduced as a part of uniform in place of Khaki cap.

1929

9, 10  नवम्बर को नागपुर के डोके मठ
में हुई सभा में डॉक्टरजी सरसंघचालक, बालाजी हुद्दार सरकार्यवाह, तथा मार्तंडराव
जोग सरसेनापति घोषित हुए।

In a meeting on 9, 10 Nov., held at Doke Math, Nagpur, Doctorji was designated as the Chief [Sarsangh chalak], Balaji Huddar as General Secretary [sarkaryavaha] and Marthanda Rao Jog as Chief Trainer  [sarsenapathi].

 

1928

प्रथम गुरुदक्षिणा उत्सव हुआ। प्रथम उत्सव का समर्पण रु. 84/- रहा।
श्री. विट्ठलभाई पटेल की मोहिते शाखा को भेंट।
1928 के अंत तक नागपुर में 18 शाखाएँ प्रारंभ।
प्रथम शीत शिबिर का आयोजन। पथ संचलन में प्रथम बार घोष का प्रयोग।
डॉक्टरजी कलकत्ता में सुभाषचंद्र बोस से मिले।
मार्च में प्रतिज्ञा का प्रथम कार्यक्रम। 99 स्वयंसेवकों ने प्रतिज्ञा ली।

 

First Guru Dakshina Utsavam held with a total contribution - samarpana - of Rs.84
Shri Vithal Bahi Patel, elder brother of Sardar Patel visited the Mohitewada shakha in Nagpur.
18 Shakhas in Nagpur at 1928 year end.
First winter camp was held. Route march with band -ghosh - was conducted. Route march was synchronized with the song Jhanda Hindu Rashtra Ka.
Meeting between Doctroji and Subhash Bose took place in Calcutta.
March 1928 First ceremony of initiation - Pratigna - was conducted. A selected group of 99 swayamsevaks participated.

 

1927

प्रथम अधिकारी प्रशिक्षण वर्ग (officer's training camp) मई में हुआ। 40 दिन के वर्ग में 17 शिक्षार्थों ने भाग लिया।
भाषण के लिए बौद्धिक वर्ग शब्द प्रयोग प्रचलित हुआ।

  Special training camp with the name O.T.C. - Officers Training Camp - was held in May with 17 participants - siksharthis.
The name Boudhik was used for the intellectual discourses in shakhas.

1926

अप्रैल 17, डॉक्टरजी के घर में उपस्थित सभा ने संघ का नाम निश्चित किया। जरिपटका मंडल, भारत उद्धारक मंडल, हिंदू सेवक संघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन चार प्रस्तावित नामों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यह नाम चुना गया।
नागपुर के मोहितेबाड़ा में प्रतिदिन 1 घंटे का मिलन नित्य शाखा 28- मई से प्रारंभ। दंड’ (लाठी) का शारीरिक शिक्षा में समावेश हुआ। दक्ष, आरंभ जैसी संस्कृत आज्ञाएँ उपयोग में लाना प्रारंभ। भगवा ध्वज को प्रणाम करके कार्यक्रम प्रारंभ और अंत में प्रार्थना कर के समापन की पद्धति का प्रारंभ। प्रार्थना अंशतः हिंदी और अंशतः मराठी में होती थी।
प्रथम पथ संचलन हुआ जिसमें 30 स्वयंसेवकों ने सहभाग लिया।

 

The name 'Rashtriya Swayamsevak Sangh' was selected for Sangh on April 17 in a meeting called for this purpose at Dr. Hedgewar house, from a list of four names - Jareepatak Mandal, Bharat Uddharak Mandal, Hindu Sevak Sangh, and Rashtriya Swayamsevak Sangh.

Daily meetings - Nitya Shakhas - were started at Mohitewada ground in Nagpur on 28th May. Lathi -Danda - was introduced in the shakha. New commands Daksha, Arama were used for the first time in shakhas. The tradition of commencing the daily activities with salutation to the Bhagawa Dhwaj and concluding with the Prayer - Prarthana - in Hindi and Marathi was instituted.

First route march - patha sanchalan - was held with 30 participants.

1925

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (डॉक्टरजी), संघ के संस्थापक, इन्होंने विजयादशमी दि. 27 सितम्बर को, अपने घर में बुलायी गई सभा में घोषित किया, आज हम संघ प्रारंभ कर रहे हैं, हम में से हर एक ने शारिरिक, बौद्धिक तथा सभी दृष्टि से, अपना ध्येय साध्य करने के लिए, स्वयं को प्रशिक्षित करना चाहिए।’’
हर रविवार को समता, संचलन का प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। हर गुरुवार और रविवार को राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों पर भाषण प्रारंभ हुआ।

 




$img_title Doctor Kesava Rao Baliram Hedgewar (Doctorji), the founder of Sangh, announced on Vijayadasami day, September 27, that "we are inaugurating the sangh today,. All of us must train ourselves physically, intellectually and in every way so as to be capable of achieving our cherished goal".

 


$img_titleFormal beginning of Sangh took place in Doctor Hedgewar's house in Sukrawadi of Nagpur.Training in Drill, march etc. was imparted on Sundays. Uniform for this training was Khaki shirt, Khaki short, and Khaki Cap. On Thursdays and Sundays there were discourses on national affairs.